Thursday, May 20, 2010

शेरों की दौड

हुई आँखें नम, तेरे इंतजार में 'उदय'

कम से कम, अब इन्हें छलकने तो दो
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न चाहो उन्हे तुम, जिन्हे तुम चाहते हो

चाहना है, तो उन्हे चाहो, जो तुमको चाहते हैं।

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न छोडी कसर उन ने, कांटो को चुभाने में,
खड़े हैं अब अकेले ही, सँजोकर आरजू दिल में ।

2 comments:

Arvind Mishra said...

यह भी बढियां !

sangeeta swarup said...

न छोडी कसर उन ने, कांटो को चुभाने में,
खड़े हैं अब अकेले ही, सँजोकर आरजू दिल में ।

हम्म....उन ने ये कहीं उलझन दे रहा है....

बाकी बढ़िया है