Friday, July 16, 2010

शेर

ताउम्र समेटते रहे दौलती पत्थर
मौत आई तो मिटटी ही काम आई ।

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वो बन गये थे रहनुमा, मुफ्त में खिलौने बाँटकर
खिलौने जान ले-लेंगें, ये सोचा नहीं था ।

3 comments:

उठा पटक said...

बहुत बढिया!

सर्प संसार said...

गजब के शेर हैं, आपकी पसंद की दाद देनी पडेगी।
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नाग बाबा का कारनामा।
व्यायाम और सेक्स का आपसी सम्बंध?

Divya said...

sundar abhivyakti !

aabhar !