Monday, June 7, 2010

कल क्या है !

कल क्या है, कल किसने देखा है, कल का कल देखेंगे, कल के सपने देखना बंद करो, कल के चक्कर में आज खराब मत करो ... ऎसे बहुत सारे प्रश्न हैं जिन पर समय-बे-समय चर्चा होते रहती है।

आज हम इन संपूर्ण सवालों पर प्रकाश डालने का प्रयत्न करते हैं, सर्वप्रथम कल, आज, और कल पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहेंगे ... कल अर्थात अतीत जो गुजर गया, भूतकाल ... आज अर्थात जो चल रहा है, वर्तमान ... कल अर्थात जो आने वाला है, भविष्य ... मनुष्य जीवन के ये तीन महत्वपूर्ण चक्र हैं भूत, वर्तमान, भविष्य।

भूत अर्थात गुजरा हुआ कल जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता ... गुजरी हुई होनी-अनहोनी, लाभ-हानि, सुख-दुख, उतार-चढाव ये सब हमें अतीत की याद दिलाते हैं जो साक्षात मनुष्य जीवन के गुजरे हुए पल हैं ... इन से कोई इंकार नहीं कर सकता।

आज अर्थात वर्तमान, जो हो रहा है, जिसे हम जी रहे हैं, जो महसूस कर रहे हैं, अच्छा-बुरा, इधर-उधर, भागम-भाग, लेना-देना, रोना-गाना, जीना-मरना ... ये वर्तमान है जिसे हम अपनी आंखों के सामने देख रहे व महसूस कर रहे हैं।

अब हम आने वाले कल अर्थात भविष्य पर प्रकाश डालते हैं, ... कल क्या है, जो अगले क्षण होने वाला है वही कल है ... कल किसने देखा है, हम ने देखा है - हम देखेंगे, क्या हम इंकार कर सकते हैं कि हम बचपन से ही आने वाले कल को देखते हुये नहीं आ रहे हैं।

कल का कल देखेंगे, उचित है यह कहना, पर कितना, ऎसे कितने मुर्ख या बुद्धिमान हैं जो कल की रणनीति आज बना कर नहीं चलते, शायद बहुत कम लोग हों, लगभग प्रत्येक समझदार आने वाले कल की योजनाएं बना कर चलता है, आज की मजबूत बुनियाद पर ही कल मजबूत इमारत खडी हो सकती है।

कल के सपने देखना बंद करो, कल के चक्कर में आज खराब मत करो, क्यों - किसलिये ... आने वाले कल की योजनाएं व सपने जितने सुनहरे होंगे संभवत: आने वाला कल भी उतना ही सुनहरा होगा ... इसलिये यह आवश्यक है कि हम कल की ओर सदैव सचेत व सकारात्मक रहें।

जिस प्रकार हम अतीत व वर्तमान से इंकार नहीं कर सकते ठीक उसी प्रकार आने वाले कल से भी इंकार नहीं किया जा सकता ... आने वाले कल को सपने की तरह अपनी अपनी आंखों में संजोकर रखना मनुष्य जीवन का महत्वपूर्ण पहलु है।

जय गुरुदेव
( विशेष टीप :- यह लेख आचार्य जी ब्लाग पर प्रकाशित है )

4 comments:

arvind said...

kaal ko bhut, vartman our bhavishya---teen khandon me baatanaa jarri hai....?yadi sabhi ko ek kar dete......pls think about this philosphy...kyonki aapka jhukaav aadhyaatm ki or ho gayaa hai...

माधव said...

sahee kaha

आचार्य जी said...

आईये जानें … सफ़लता का मूल मंत्र।

आचार्य जी

दिलीप said...

sahi kaha sirji...