Tuesday, September 7, 2010

मैकदा


क्यूँ खफा हो, अब वफा की आस में
हम बावफा से, बेवफा अब हो गये हैं।

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छोड दूँ मैं मैकदा, क्यों सोचते हो
कौन है बाहर खडा, जो थाम लेगा।

4 comments:

Udan Tashtari said...

बेहतरीन!

Rahul said...

Nice...छोड दूँ मैं मैकदा, क्यों सोचते हो
कौन है बाहर खडा, जो थाम लेगा।

अशोक बजाज said...

अच्छा लगा .धन्यवाद
* पोला त्योहार की बधाई .*

S.M.HABIB said...

बढ़िया